Sunday, November 20, 2011

main aur meri mej....

मेरी मेज !! 
 हमेशा से ही अपने बिस्तर के पास मेज़ रखने की आदत रही  है, जहाँ मैं अपना कुछ ज़रूरी सामान रख सकूं ! और  आज जब मैं अपने पलंग के बगल में देखता हूँ तो एक मेज ज़रूर पता हूँ !
क्या ये वही मेज है जो कभी स्कूल में पढ़ते समय हुआ करती थी ? 
इस सवाल का जवाब मेरे को सोचने पर मजबूर कर देता है , और मैं सोचने लगता हूँ !
 स्कूल के दिनों में मेज पर गणित ,भौतिकी और रसायन शास्त्र की किताबों के साथ कुछ ओशो की किताबें भी होती थी... और  धीरे धीरे कंप्यूटर फिर लैपटॉप ने भी अपनी जगह बना ली !
और आज जब मैं अपनी मेज को देखता हूँ तो क्या पता हूँ ...
१.)भगवान् बुध की तस्वीर .
२.)मेरी डायरी
३.)शांताराम 
४.)लव इन टेम्स ऑफ़ कोलेरा 
५ .)अंग्रेजी की डिक्शनरी 
६.)कुछ पिक्चरों की सी दी 
और सबसे विचित्र एक रम की बोतल !  परिवर्तन जीवन का नियम है ,ये मैं काफी पहले से जानता हूँ ! पर परिवर्तन किस तरह अपने आप को जनम देता है ये सब खुद खुद अपनी ज़िन्दगी को देख कर ही सीखा है !     
जीवन हमें कुछ सीखना चाहता है , और शायद हम सीखते भी हैं !!! 

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